आओ चलें साजन सुधियों के गांव में
सरिता के तट पे घने पीपल की छांव में
बीत गया पतझड़ बसंती बहार है
फूलों से सुगंधित महकी बयार है
अम्बर का इन्द्रधनुष सपनों का आंचल
गीतों के संग बजे गीतों की पायल
शाखों पे सरसों के फूलों का झूमना
नन्हे परिन्दों का अम्बर को चूमना
भोर भए यूं चिड़ियों का फिर गीत गाना
परदेसी जल्दी से घर लौट के आना
-सरफ़राज़ ख़ान
Friday, October 2, 2009
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2 comments:
ख़ूबसूरत रचना भाई
अम्बर का इन्द्रधनुष सपनों का आंचल
गीतों के संग बजे गीतों की पायल
बहुत बेहतरीन सरफराज जी बेहतरीन
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