Friday, October 2, 2009

आओ चलें साजन सुधियों के गांव में


आओ चलें साजन सुधियों के गांव में
सरिता के तट पे घने पीपल की छांव में

बीत गया पतझड़ बसंती बहार है
फूलों से सुगंधित महकी बयार है

अम्बर का इन्द्रधनुष सपनों का आंचल
गीतों के संग बजे गीतों की पायल

शाखों पे सरसों के फूलों का झूमना
नन्हे परिन्दों का अम्बर को चूमना

भोर भए यूं चिड़ियों का फिर गीत गाना
परदेसी जल्दी से घर लौट के आना
-सरफ़राज़ ख़ान

2 comments:

Pankaj Mishra said...

ख़ूबसूरत रचना भाई

मोहन वशिष्‍ठ 9988097449 said...

अम्बर का इन्द्रधनुष सपनों का आंचल
गीतों के संग बजे गीतों की पायल

बहुत बेहतरीन सरफराज जी बेहतरीन